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Monday, 5 January 2026

बुंदेलखंड की बोली बहुत ही मधुर एवं अपनेपन का बोध कराने वाली है,- मुनि सुव्रतसागर।

 बुंदेलखंड की बोली बहुत ही मधुर एवं अपनेपन का बोध कराने वाली है,- मुनि सुव्रतसागर।





ग्राम-पवा की पावन धरा पर प्रभु की भक्ति में झूमे युवा, गूँजे भजन।

तालबेहट (ललितपुर) ग्राम पवा के आदिनाथ दिगम्बर जैन में मुनि सुव्रतसागर महाराज ने धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए कहा हमारे अच्छे बुरे कर्मों से ही हमारे भविष्य का निर्धारण होता है। हम जीवन में जैसे कर्म करते हमें भविष्य में उसका फल भोगना होता है। 12 से 17 जनवरी 2026 तक दिगम्बर जैन सिद्ध क्षेत्र पावागिरि में आयोजित श्रीमज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक जिनबिम्ब प्रतिष्ठा एवं नव रथ महामहोत्सव कार्यक्रम में ग्रामीणों के वात्सल्य निमंत्रण हेतु ग्राम पवा में भजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें प्रतिष्ठा कार्यक्रम से पूर्व विधिनायक भगवान एवं तीर्थंकर भगवान के जिनबिम्ब की गोद भरायी संस्कार किये गये, जिसमें सकल समाज एवं सभ्रान्त ग्रामीणों ने बढ़चढ़ कर भाग लिया। महिलाओं ने सुन्दर भजनों की प्रस्तुति दी एवं युवा नृत्य करते हुए भगवान की भक्ति में खूब झूमे। इस मौके पर वात्सल्य मूर्ति बुंदेली संत मुनि सुव्रतसागर महाराज पावागिरि से पद विहार कर ग्राम पवा पहुँचे तो भारी जन समूह ने पलक पाँवड़े बिछाकर मुनि श्री की आगुवानी की। मुनि श्री ने आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर के दर्शन किये। मंगलाचरण विशाल जैन पवा ने स्वरचित मुनि सुव्रतसागर वंदना से किया। मुनि श्री धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए कहा की हमें अपनी संस्कृति को कभी नहीं भूलना चाहिए। हमारे यहाँ की बोली बहुत ही मधुर एवं अपनेपन का बोध कराने वाली है, अपने यहाँ का 'हओ' शब्द बड़ा ही प्रचलित है जिसका उच्चारण आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज भी बड़े प्रेम से करते थे जबकि उनका जन्म कर्नाटक में हुआ था। मुनि श्री ने राम - सीता का प्रसंग सुनाते हुए शाश्वत क्षेत्र अयोध्या जी का गुणगान किया। उन्होंने कहा निश्चित ही जब भगवान राम अयोध्या से दक्षिण भारत के लिए निकले होंगे तो इस भूमि को भी पावन किया होगा। पंचकल्याणक कार्यक्रम स्थल को भी अयोध्या नगरी बनाया जाता है जिसमें पाषाण को भगवान बनाने के संस्कार किये जाते हैं, जिसमें सभी से पहुँचने का आव्हान किया। कार्यक्रम का संचालन पं. सिंघई सौरभ जैन शास्त्री एवं आभार व्यक्त आनंद जैन पवा ने किया।

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